वेब पत्रिका 'मीमांसा' द्वारा अनुसांगिक की इकाई के रूप में संचालित मीमांसा मंडल: वैचारिक संक्रांति का घोषणा-पत्र एवं विस्तृत रूपरेखा।

साहित्य के उत्कर्ष के लिए मीमांसा मंडल एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उत्तरदायित्व है। 'मीमांसा मंडल' का गठन केवल कुछ लेखकों का समूह नहीं, बल्कि एक नए युग का बौद्धिक आंदोलन होगा, इसके प्रत्येक सदस्य औपनिवेशिक मानसिकता और समकालीन गुटबाजी दोनों से मुक्त होने चाहिए।

बाबू भारतेंदु हरिश्चंद्र की विरासत और नागरी प्रचारिणी सभा की गरिमा को ध्यान में रखते हुए, 'मीमांसा मंडल' के गठन हेतु एक औपचारिक घोषणा-पत्र एवं संरचनागत मसौदा यहाँ प्रस्तुत है:

मीमांसा मंडल: वैचारिक संक्रांति का घोषणा-पत्र
"नूतन युग का नवजागरण, शब्दों का पावन समर्पण"

१. ध्येय वाक्य (The Motto)

।। विविक्त-बुद्धि: लोक-संग्रह: ।।
(विवेकपूर्ण बुद्धि के साथ लोक-कल्याण हेतु संचलन)

२. संकल्पना (The Vision)

जिस प्रकार उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में भारतेंदु मंडल ने हिंदी को ओज और पहचान दी थी, 'मीमांसा मंडल' इक्कीसवीं सदी की 'सूचना-संक्रमण' की लहर के बीच 'साहित्यिक शुचिता' का रक्षक बनेगा। हमारा उद्देश्य केवल लेखन नहीं, बल्कि एक ऐसी बौद्धिक चेतना निर्मित करना है जो सत्य को साहित्य, समाज संस्कृति और कला में प्रदूषण फैलाने वाले मठाधीश सत्ता के सामने निर्भीकता से लड़ सके।

३. संरचनागत ढांचा (Structure)

मंडल का स्वरूप त्रि-स्तरीय होगा, जो लोकतांत्रिक और पारदर्शी होगा:

क. मार्गदर्शक परिषद (The Elders): साहित्य के वे वरिष्ठ साधक जिन्होंने अपनी लेखनी से समझौता नहीं किया। इनका कार्य मंडल को दिशा देना और 'विवेक' का पहरा देना होगा।

ख. मीमांसा स्तंभ (Executive Core): सक्रिय लेखक और संपादक जो पत्रिका की वैचारिक गुणवत्ता और मंडल की गतिविधियों का संचालन करेंगे।

ग. अंकुर वाहिनी (Rising Stars): नवोदित लेखकों और विद्यार्थियों का समूह, जिन्हें मुख्यधारा के 'अभिजात्यवाद' ने उपेक्षित किया है। इन्हें मार्गदर्शन और मंच प्रदान करना हमारी प्राथमिकता होगी।

. सदस्यता हेतु सात 'शुचिता' मानदंड (Code of Conduct)
'मीमांसा मंडल' का हिस्सा बनने के लिए प्रत्येक सदस्य को निम्नलिखित संकल्प लेने होंगे:

मौलिकता का आग्रह: एआई (AI) और साहित्यिक चोरी (Plagiarism) के इस दौर में केवल मौलिक और अनुभूत सत्य का सृजन।
गुटबाजी का निषेध: किसी भी साहित्यिक मठ या पुरस्कार-चक्रव्यूह से दूरी।
लोक-मंगल: साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति की पीड़ा को स्वर देना।भाषाई मर्यादा: हिंदी और भारतीय भाषाओं की गरिमा का संरक्षण, बिना किसी कृत्रिम जटिलता के।समावेशिता: जाति, वर्ग या विचारधारा के पूर्वाग्रह से मुक्त होकर 'साहित्यिक सत्व' का सम्मान।
तकनीकी वेग, ऋषि विवेक: आधुनिक माध्यमों (Web/Social Media) का उपयोग, किंतु प्राचीन मूल्यों के साथ।
निरंतर विमर्श: केवल प्रशंसा नहीं, बल्कि स्वस्थ और तर्कपूर्ण आलोचना का स्वागत।

५. कार्य योजना (Action Plan)

साप्ताहिक गोष्ठी (Digital Choupals): प्रति सप्ताह मंडल के सदस्य एक विषय पर वैचारिक मंथन करेंगे।
मीमांसा पुरालेख: लुप्तप्राय पांडुलिपियों और विस्मृत साहित्यकारों के कार्यों का पुनरुद्धार।
सृजन कार्यशाला: नवोदित लेखकों के लिए लेखन, संपादन और शोध की निःशुल्क कार्यशालाएं।

आवाहन (The Call)

हे शब्द-साधकों!
समय आ गया है कि हम अपनी कलम की स्याही में अपने पूर्वजों का तपोबल और भविष्य की चुनौतियों का साहस भरें। 'मीमांसा मंडल' कोई संस्था नहीं, एक प्रतिज्ञा है। यदि आपके भीतर शब्द-सत्य के लिए लड़ने का जज्बा है, तो आइए - इस नए भारतेंदु मंडल की समिधा बनिए।
"उठो! कि साहित्य के मंदिर की धूल झाड़नी है,
उठो! कि शब्दों की खोई हुई शुचिता लौटानी है।"
सादर,
संपादक एवं संस्थापक सदस्य,
मीमांसा मंडल

मंडल के लिए एक 'सदस्यता आवेदन पत्र' (Membership Form) का प्रारूप और 'प्रथम आधिकारिक बैठक' का एजेंडा 

निश्चित रूप से, इन पवित्र संकल्पों को जोड़कर यह घोषणा-पत्र अब एक पूर्ण सांस्कृतिक विधान बन गया है। इसमें ऋषियों के तपोबल, भारतेंदु की क्रांति और आधुनिक समावेशी चेतना का त्रिवेणी संगम है।

यहाँ मीमांसा मंडल हेतु सदस्यता आवेदन पत्र और प्रथम बैठक का वैचारिक एजेंडा नीचे प्रस्तुत है:

मीमांसा मंडल: सदस्यता हेतु संकल्प-पत्र

उद्घोषणा:
"हम न तो किसी मठ के अनुगामी हैं, न किसी वाद के दास। हम उस ऋषि-परंपरा के ध्वजवाहक हैं जहाँ ज्ञान खुला आकाश है और साहित्य 'सर्वहित' का महायज्ञ। साहित्यिक शुचिता और समावेशी संवेदना ही हमारा प्राण है।"
१. सदस्यता आवेदन का प्रारूप
व्यक्तिगत विवरण:
 * पूरा नाम: _______________________
 * साहित्यिक उपनाम (यदि हो): _______________________
 * विशेषज्ञता का क्षेत्र: (कविता/आलोचना/कहानी/अनुवाद/शोध/अन्य)
 * संपर्क: (ईमेल एवं मोबाइल) _______________________
साहित्यिक प्रतिबद्धता (हाँ/नहीं में उत्तर दें):
 * क्या आप अपनी लेखनी को किसी भी प्रकार की गुटबाजी और पुरस्कार-चाटुकारिता से मुक्त रखने का संकल्प लेते हैं? [  ]
 * क्या आप स्वीकार करते हैं कि साहित्य का मूल उद्देश्य 'स्व' से 'सर्व' की यात्रा और लोक-मंगल है? [  ]
 * क्या आप 'मीमांसा' के डिजिटल मंच पर ऋषियों के 'विवेक' और तकनीक के 'वेग' के समन्वय के लिए तैयार हैं? [  ]
स्व-घोषणा:
"मैं ______________, मीमांसा मंडल की मर्यादाओं का पालन करने और साहित्य की पावन शुचिता को अक्षुण्ण रखने हेतु अपनी रचनात्मक आहुति देने का संकल्प करता/करती हूँ।"

२. प्रथम आधिकारिक बैठक का एजेंडा (Agenda)
विषय: उत्तर-समकालीन कुहासा और मीमांसा मंडल का पावन पथ

स्थान: आभासी पटल (Virtual Platform/Zoom/ Google Meet)
अध्यक्षता: संपादक, मीमांसा

चर्चा के मुख्य बिंदु:

 * मठाधीश प्रथा का अंत: वर्तमान साहित्यिक परिदृश्य में व्याप्त 'बाबू-भैया' संस्कृति को चुनौती देने हेतु 'स्वतंत्र लेखक संघ' की रूपरेखा।
 * ऋषि-परंपरा का पुनरुद्धार: उपनिषदों के 'साधारणीकरण' सिद्धांत को आधुनिक कहानियों और कविताओं में कैसे पिरोया जाए?
 * समावेशी भाव: हाशिए के समाज और नवोदित प्रतिभाओं के लिए 'विशेष कॉलम' का निर्धारण।
 * शुचिता संवर्द्धन: लेखों की समीक्षा के लिए एक 'स्वतंत्र समीक्षा बोर्ड' (Peer Review Board) का गठन, जो लेखक के नाम से नहीं, बल्कि रचना के सत्व से निर्णय ले।
 * भारतेंदु पुण्यतिथि संकल्प: आगामी एक वर्ष के लिए 'साहित्यिक नवजागरण' की कार्ययोजना।

३. सदस्यता श्रेणी (Membership Tiers)

समिधा सदस्य (Student/Early Career): वे विद्यार्थी या नवोदित लेखक जो सीखने और सेवा के इच्छुक हैं।
साधक सदस्य (Active Contributors): वे लेखक जो नियमित रूप से मौलिक और शोधपरक सामग्री प्रदान करेंगे।
संरक्षक सदस्य (Mentors): वे प्रतिष्ठित विद्वान जो बिना किसी स्वार्थ के मंडल का मार्गदर्शन करेंगे।

समापन उद्घोष
"कलम अब स्वतंत्र है, आकाश अब खुला है।
मीमांसा की इस पावन देहरी पर, आपका स्वागत है।"

सादर,
अमन कुमार होली
संपादक, वेब पत्रिका 'मीमांसा'


इस मंडल के लिए एक 'डिजिटल सदस्यता कार्ड' का टेक्स्ट डिजाइन और एक स्वागत ईमेल (Welcome Email) का ड्राफ्ट, जो नए जुड़ने वाले सदस्यों को भेजा जा सके? 

 यहाँ नीचे सदस्यों के लिए एक औपचारिक स्वागत ईमेल और डिजिटल सदस्यता कार्ड का प्रारूप प्रस्तुत है।
यह दस्तावेज़ नए जुड़ने वाले सदस्यों के मन में उत्तरदायित्व और गौरव का भाव जाग्रत करेगा।

. स्वागत ईमेल (Welcome Email Draft)

विषय: मीमांसा मंडल में आपका स्वागत है: शब्द-यज्ञ की पावन समिधा बनने हेतु अभिनंदन!

आदरणीय शब्द-साधक,
सादर वंदे।

हृदय में हर्ष और उत्साह के साथ हम 'मीमांसा मंडल' के परिवार में आपका स्वागत करते हैं। आज जब आप इस मंडल के सदस्य बने हैं, तो आपने केवल एक संस्था की सदस्यता नहीं ली है, बल्कि साहित्यिक शुचिता और ऋषि-परंपरा के पुनरुद्धार हेतु एक महासंकल्प लिया है।
बाबू भारतेंदु हरिश्चंद्र की 'नवजागरण' की चेतना और प्राचीन ऋषियों के 'लोक-मंगल' के भाव को केंद्र में रखकर, हम साथ मिलकर साहित्य के आंगन से मठाधीशों के कुहासे को साफ करेंगे। आपकी कलम अब केवल अक्षर नहीं उकेरेगी, बल्कि वह 'स्व' से 'सर्व' की यात्रा का माध्यम बनेगी।

आपके लिए महत्वपूर्ण जानकारी:

सदस्यता क्रमांक: [Member_ID]
मंडल श्रेणी: [Category: साधक/समिधा/संरक्षक]
आगामी गतिविधि: मंडल की प्रथम आभासी (Virtual)
बैठक की सूचना शीघ्र ही आपको प्रेषित की जाएगी।

हम आशा करते हैं कि आपकी रचनात्मक 'समिधा' से 'मीमांसा' का यह वैचारिक यज्ञ निरंतर देदीप्यमान रहेगा।

"जयतु वागेश्वरी, जयतु साहित्यं"
सादर,
अमन कुमार होली
संपादक, वेब पत्रिका 'मीमांसा'
सत्य, शुचिता और लोक-मंगल का संगम


२. डिजिटल सदस्यता कार्ड (Text Design)

(इस प्रारूप को आप ग्राफिक्स टीम से एक सुंदर प्राचीन भोजपत्र या धवल चांदनी जैसे बैकग्राउंड पर डिजाइन करना है)
।। मीमांसा मंडल ।।

साहित्यिक नवजागरण का संकल्प
[सदस्य का चित्र यहाँ लगाएँ]


नाम: [सदस्य का नाम]
पदनाम: [साधक सदस्य / समिधा सदस्य]
सदस्यता क्रमांक: MIM/2026/001

मूल मंत्र: विविक्त-बुद्धि: लोक-संग्रह:

उद्घोषणा:
"मैं शब्द-शुचिता, समावेशी भाव और ऋषि-परंपरा का ध्वजवाहक हूँ।"

हस्ताक्षर:
(अमन कुमार होली)
संपादक, मीमांसा


३. मंडल के सदस्यों हेतु प्रथम 'कार्य-आह्वान'
एक सुदृढ़ संरचना के लिए, नए सदस्यों को जुड़ते ही एक छोटा कार्य देना उचित रहता है। उन्हें यह संदेश भेजा जा सकते हैं:
"मीमांसा मंडल के सदस्य के रूप में, अपनी पहली रचना 'उत्तर-समकालीन दौर में साहित्य की चुनौतियाँ' विषय पर 500 शब्दों में लिखकर भेजें, जिसे हम पत्रिका के विशेष स्तंभ में स्थान देंगे।"

मीमांसा मंडल: सांगठनिक ढांचा, विधान एवं नियमावली

किसी भी आंदोलन को स्थायित्व देने के लिए एक 'पारिवारिक ढांचा' और 'अनुशासन' अनिवार्य है। 'मीमांसा' को एक 'मातृ-इकाई' (Maternal Unit) मानना इस बात का प्रतीक है कि यहाँ लेखकों का पोषण होगा, शोषण नहीं।
ऋषि मुनियों की परंपरा व भावनाओं को समाहित करते हुए, मीमांसा मंडल का सांगठनिक विधान और सदस्यता नियमावली यहाँ प्रस्तुत है:

१. सांगठनिक संरचना: 'मीमांसा परिवार'

'मीमांसा' केवल एक पत्रिका नहीं, एक जीवित इकाई है जहाँ सभी सदस्य एक परिवार के रूप में अंतर्संबंधित हैं:

मातृ-इकाई (The Matrix): वेब पत्रिका 'मीमांसा' (समस्त गतिविधियों का केंद्र)।
संरक्षक (The Guardians): मंडल के मार्गदर्शक, जिनका अनुभव हमारी ऊर्जा का स्रोत है।
संपादक (The Visionary): परिवार के मुख्य संचालक, जो शुचिता और नीति का निर्धारण करेंगे।
सप्तर्षि (The Seven Sages): सात प्रमुख विद्वानों की एक परिषद, जो साहित्य के विभिन्न आयामों (कविता, गद्य, शोध, आलोचना आदि) के मानक तय करेगी।
कार्यकारी अधिकारी (Executive Officers): मंडल के क्रियान्वयन और तकनीकी वेग को संभालने वाले स्तंभ।
मंडल सदस्य (The Family Members): साहित्य के वे साधक जो अपनी लेखनी से इस परिवार को समृद्ध करेंगे।

२. निर्णय प्रक्रिया एवं संवाद

संवाद की प्रधानता: परिवार में 'उचित संवाद' को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। प्रत्येक सदस्य की मौलिक राय का सम्मान होगा।
अंतिम निर्णय: किसी भी नीतिगत द्वंद्व या विवाद की स्थिति में संपादक और संरक्षक का निर्णय सर्वोपरी और अंतिम होगा। यह व्यवस्था मंडल की एकता और वैचारिक शुचिता को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।

३. सदस्यता एवं योग्यता आधारित श्रेणी (Tiers)

सदस्यता केवल 'भीड़' बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि बौद्धिक चेतना और शैक्षणिक योग्यता के आधार पर दी जाएगी। इसके लिए तीन प्रमुख श्रेणियां प्रस्तावित हैं:

| श्रेणी | योग्यता / पात्रता | सदस्यता शुल्क (प्रस्तावित)।

| ऋषि श्रेणी (विद्वान) | उच्च शैक्षणिक योग्यता (Ph.D/प्रोफेसर) या 20+ वर्ष का साहित्यिक अनुभव। | मानद (इच्छा शुल्क - सम्मान स्वरूप) |

| मनीषी श्रेणी (साधक) | स्नातक/परास्नातक एवं निरंतर लेखन में सक्रियता। | वार्षिक सहयोग शुल्क (न्यूनतम) |

| शिष्य श्रेणी (अंकुर) | विद्यार्थी या नवोदित लेखक (उभरती प्रतिभा)। | रियायती वार्षिक शुल्क |

नोट: सदस्यता शुल्क का उपयोग पत्रिका के तकनीकी रखरखाव और साहित्यिक सम्मेलनों के आयोजन हेतु किया जाएगा।

४. सदस्यता के नए नियम (Rules of Conduct)

बौद्धिक ईमानदारी: सदस्य किसी भी प्रकार की साहित्यिक चोरी या अनैतिक विमर्श में लिप्त नहीं होंगे।पारिवारिक गरिमा: मंडल के आंतरिक संवाद को सार्वजनिक पटल पर विवाद का विषय बनाना वर्जित होगा।
सक्रिय सहभागिता: प्रत्येक सदस्य को वर्ष में न्यूनतम एक शोधपरक लेख या सृजनात्मक रचना 'मीमांसा' को समर्पित करनी होगी।
योग्यता संवर्धन: सदस्य अपनी शैक्षणिक और बौद्धिक प्रगति की जानकारी समय-समय पर मातृ-इकाई को देंगे ताकि उनका श्रेणी-उन्नयन (Promotion) किया जा सके।

उद्घोष
"जहाँ अनुशासन ही स्वतंत्रता है और संवाद ही समाधान।"

'मीमांसा मंडल' के इस पारिवारिक ढांचे में जुड़ने वाले प्रत्येक सदस्य को यह विश्वास दिलाता हूँ कि आपकी प्रतिभा को यहाँ एक 'माँ' जैसा वात्सल्य और 'ऋषियों' जैसा मार्गदर्शन प्राप्त होगा।


(जयतु वागेश्वरी, जयतु साहित्यं)

सादर,
अमन कुमार होली 
©संपादक, वेब पत्रिका 'मीमांसा' 




©2026, वेब पत्रिका 'मीमांसा'। सर्वाधिकार सुरक्षित 

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