गंग नीति 1

बाल से ख्याल बड़े से विरोध अगोचर नार से ना हँसिये। अन्न से लाज अगिन्न से ज़ोर अजानत नीर में ना धँसिये। बैल को नाथ घोड़े को लगाम मतंग को अंकुश में कसिये। गंग कहै सुन शाह अकब्बर कूर तें दूर सदा बसिये ॥


यह पंक्तियाँ रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि गंग द्वारा रचित हैं, जो मुगल सम्राट अकबर के दरबारी कवि थे। इन पंक्तियों में कवि ने जीवन जीने की व्यवहारिक समझ और सावधानी बरतने की सलाह दी है।
यहाँ इसका सरल हिंदी अर्थ दिया गया है:
काव्य का अर्थ
1. बाल से ख्याल बड़े से विरोध अगोचर नार से ना हँसिये।
 * बाल से ख्याल: बच्चों की बातों को दिल से नहीं लगाना चाहिए या उनके साथ ज्यादा चालाकी नहीं करनी चाहिए।
 * बड़े से विरोध: अपने से बड़ों या शक्तिशाली व्यक्तियों से व्यर्थ में दुश्मनी या विरोध नहीं मोल लेना चाहिए।
 * अगोचर नार: ऐसी स्त्री जिसे आप जानते न हों या जिसका स्वभाव अज्ञात (अगोचर) हो, उसके साथ हँसी-मजाक नहीं करना चाहिए।
2. अन्न से लाज अगिन्न से ज़ोर अजानत नीर में ना धँसिये।
 * अन्न से लाज: भोजन करने में कभी शर्म नहीं करनी चाहिए (क्योंकि यह जीवन का आधार है)।
 * अगिन्न से ज़ोर: आग के साथ कभी जबरदस्ती या ताकत का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए, क्योंकि वह जलाकर भस्म कर देती है।
 * अजानत नीर: जिस पानी की गहराई का अंदाजा न हो, उसमें कभी नहीं उतरना चाहिए।
3. बैल को नाथ घोड़े को लगाम मतंग को अंकुश में कसिये।
यहाँ कवि अनुशासन की बात कर रहे हैं:
 * बैल को नाथ (नाक की रस्सी), घोड़े को लगाम और हाथी (मतंग) को अंकुश से नियंत्रण में रखना जरूरी है। बिना नियंत्रण के ये खतरनाक हो सकते हैं।
4. गंग कहै सुन शाह अकब्बर कूर तें दूर सदा बसिये॥
 * अंत में कवि गंग सम्राट अकबर को संबोधित करते हुए कहते हैं कि हे राजा! कूर (क्रूर या दुष्ट) व्यक्ति से हमेशा दूर ही रहना चाहिए। दुष्ट व्यक्ति की संगति हमेशा नुकसानदेह होती है।

निष्कर्ष (Summary)
कवि गंग का संदेश बहुत साफ है: जीवन में सावधानी, अनुशासन और सही संगति ही सुख का मूल मंत्र है। बिना सोचे-समझे किया गया साहस या गलत व्यक्ति का साथ विनाश का कारण बन सकता है।

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