साहित्य आंदोलन

साहित्य में **आंदोलन** (Literary Movement) का तात्पर्य किसी विशेष समय काल में लेखकों, कवियों और विचारकों के उस संगठित या असंगठित समूह से है, जो समान जीवन-दर्शन, प्रवृत्तियों, और कलात्मक शैलियों को अपनाकर साहित्य की रचना करते हैं।
साहित्यिक आंदोलन किसी नए विचार को स्थापित करने या पुरानी मान्यताओं और सामाजिक-राजनैतिक विसंगतियों का विरोध करने के लिए जन्म लेते हैं।
**साहित्यिक आंदोलन की प्रमुख विशेषताएँ**
 * **तत्कालीन परिस्थितियों की प्रतिक्रिया:** जब समाज में कोई बड़ा राजनैतिक, सामाजिक या सांस्कृतिक बदलाव आता है, तो साहित्यकार पुरानी शैलियों को छोड़कर नई सोच के साथ लिखते हैं।
 * **समान विचार और उद्देश्य:** एक आंदोलन से जुड़े रचनाकारों की वैचारिक पृष्ठभूमि, भाषा शैली और सरोकार एक जैसे होते हैं।
 * **नए मानदंडों की स्थापना:** ये आंदोलन साहित्य में नए शिल्प (Form), भाषा और विषयों को जन्म देते हैं।
**हिंदी साहित्य के कुछ प्रमुख आंदोलन**
 * **भक्ति आंदोलन:** समाज में भटकाव और निराशा के दौर में ईश्वर-भक्ति, समता और लोकभाषा के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना जगाने का प्रयास (जैसे- कबीर, तुलसी, सूरदास)।
 * **छायावाद:** व्यक्तिगत अनुभूति, प्रकृति प्रेम, राष्ट्रवाद और रहस्यवाद को केंद्र में रखकर की गई काव्य रचना (जैसे- प्रसाद, निराला, पंत, महादेवी वर्मा)।
 * **प्रगतिवाद:** मार्क्सवादी विचारधारा से प्रभावित होकर शोषितों, किसानों और मजदूरों के अधिकारों की बात करने वाला आंदोलन (जैसे- नागार्जुन, केदारनाथ अग्रवाल)।
 * **प्रयोगवाद / नई कविता:** साहित्य में नए प्रयोगों, नए प्रतीकों और आधुनिक मानव की उलझनों को व्यक्त करने वाली धारा (जैसे- अज्ञेय)।
संक्षेप में, साहित्यिक आंदोलन वह वैचारिक क्रांति है जो साहित्य को जड़ता से बचाकर युग के अनुकूल नई दिशा देती है।

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