राष्ट्रभाषा पर राष्ट्रपति प्रमुख आदेश

**1. राष्ट्रपति के प्रमुख आदेश**
 * **राष्ट्रपति का आदेश, 1952:** भारतीय अंकों के अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप के साथ-साथ कुछ विशिष्ट प्रशासनिक कार्यों के लिए देवनागरी अंकों के प्रयोग की अनुमति दी गई।
 * **राष्ट्रपति का आदेश, 1955:** संविधान के अनुच्छेद 343(2) के तहत अंग्रेजी के अतिरिक्त कुछ निश्चित सरकारी प्रयोजनों (जैसे जनता के साथ पत्राचार, वारंट आदि) के लिए हिन्दी के प्राधिकृत प्रयोग की छूट दी गई।
 * **राष्ट्रपति का ऐतिहासिक आदेश, 1960:** प्रथम राजभाषा आयोग (खेर आयोग) और पंत समिति की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद 27 अप्रैल 1960 को जारी हुआ। मुख्य निर्देश:
   * **शब्दावली निर्माण:** विधि और वैज्ञानिक शब्दावली के निर्माण हेतु स्थायी आयोगों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ।
   * **प्रशिक्षण:** 45 वर्ष से कम आयु वाले केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सेवाकालीन हिन्दी प्रशिक्षण (प्रबोध, प्रवीण, प्राज्ञ) अनिवार्य किया गया।
   * **विधि एवं अनुवाद:** सभी केंद्रीय अधिनियमों, नियमों और संहिताओं के अधिकृत हिन्दी अनुवाद की व्यवस्था तय की गई।
   * **भर्ती परीक्षाएँ:** यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षाओं में अंग्रेजी के साथ-साथ हिन्दी को वैकल्पिक माध्यम के रूप में चरणबद्ध ढंग से शामिल करने का निर्देश।
**2. राजभाषा से संबंधित प्रमुख आयोग**
 * **प्रथम राजभाषा आयोग (1955):** बी. जी. खेर की अध्यक्षता में गठित। 1956 में रिपोर्ट सौंपी; अंग्रेजी के स्थान पर हिन्दी के क्रमिक और व्यावहारिक प्रयोग की पहली विस्तृत रूपरेखा दी।
 * **विधि आयोग / राजभाषा (विधायी) आयोग (1961):** राष्ट्रपति के 1960 के आदेश के तहत कानून मंत्रालय में गठित, जिसका कार्य केंद्रीय अधिनियमों और सांविधिक नियमों का प्राधिकृत हिन्दी पाठ तैयार करना था (बाद में इसे विधायी विभाग के राजभाषा खंड में समाहित किया गया)।
 * **वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग (1961):** विभिन्न विज्ञान, मानविकी और तकनीकी अनुशासनों में मानक शब्दावली निर्माण हेतु गठित।
**3. राजभाषा अधिनियम एवं संशोधन**
 * **राजभाषा अधिनियम, 1963:** 26 जनवरी 1965 की 15-वर्षीय मियाद समाप्त होने पर अंग्रेजी के प्रयोग को अनिश्चित काल तक जारी रखने का कानूनी आधार बना।
 * **राजभाषा (संशोधन) अधिनियम, 1967:** इसमें द्विभाषी नीति को संस्थागत स्वरूप दिया गया:
   * **धारा 3(3) का अनिवार्य द्विभाषिक प्रावधान:** 14 प्रकार के दस्तावेज़ (संकल्प, सामान्य आदेश, नियम, अधिसूचनाएँ, प्रशासनिक व अन्य प्रतिवेदन, प्रेस विज्ञप्तियाँ, संविदाएँ, करार, लाइसेंस, परमिट, निविदा सूचनाएँ आदि) अनिवार्य रूप से **हिन्दी और अंग्रेजी दोनों** में एक साथ जारी होने आवश्यक हैं।
   * **अहिन्दी-भाषी राज्यों के लिए सुरक्षा:** जब तक सभी अहिन्दी-भाषी राज्य विधानमंडल प्रस्ताव पारित न कर दें, तब तक संघ के कामकाज में अंग्रेजी समाप्त नहीं की जाएगी।
   * **धारा 4:** राजभाषा की प्रगति की समीक्षा हेतु स्थायी संसदीय राजभाषा समिति का प्रावधान।
**4. राजभाषा नियम, 1976 (यथासंशोधित 1987 व 2011)**
राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 8 के तहत बनाए गए ये नियम तमिलनाडु को छोड़कर पूरे देश पर लागू होते हैं। इसके तहत राज्यों को तीन भाषाई क्षेत्रों में विभाजित किया गया:
| क्षेत्र | शामिल राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | पत्राचार का मूल नियम |
|---|---|---|
| **'क' क्षेत्र** | उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़ और दिल्ली, अण्डमान-निकोबार। | केंद्र से इन राज्यों को या आपसी पत्राचार **केवल हिन्दी** में। अंग्रेजी का प्रयोग अपवादस्वरूप ही संभव है। |
| **'ख' क्षेत्र** | पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र और चंडीगढ़, दमन-दीव, दादरा एवं नगर हवेली। | पत्राचार सामान्यतः **हिन्दी** में; यदि अंग्रेजी में भेजा जाए तो हिन्दी अनुवाद साथ जाना चाहिए। |
| **'ग' क्षेत्र** | शेष सभी दक्षिणी, पूर्वोत्तर व गैर-हिन्दी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश। | केंद्र से पत्राचार **अंग्रेजी** में; किन्तु इन राज्यों से प्राप्त हिन्दी पत्रों का उत्तर अनिवार्य रूप से हिन्दी में ही दिया जाएगा। |
 * **नियम 5:** हिन्दी में प्राप्त किसी भी पत्र, अर्जी या आवेदन का उत्तर अनिवार्य रूप से हिन्दी में ही दिया जाना विधिक रूप से बाध्यकारी है।
 * **नियम 10(4) व 8(4):** जिस कार्यालय के 80% कर्मचारी कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं, उसे राजपत्र में अधिसूचित (Notified) किया जाता है और वहाँ विशिष्ट फाइलों पर केवल हिन्दी में टिप्पण-आलेखन अनिवार्य किया जा सकता है।
**5. राजभाषा संकल्प, 1968**
संसद के दोनों सदनों द्वारा दिसंबर 1967 में पारित और 18 जनवरी 1968 को अधिसूचित संकल्प:
 * **त्रि-भाषा सूत्र (Three-Language Formula):** शिक्षा के क्षेत्र में हिन्दी-भाषी राज्यों में हिन्दी और अंग्रेजी के अतिरिक्त एक आधुनिक भारतीय भाषा (विशेष रूप से दक्षिण भारत की भाषा), तथा अहिन्दी-भाषी राज्यों में प्रादेशिक भाषा व अंग्रेजी के साथ हिन्दी के अध्ययन की संस्तुति।
 * **वार्षिक कार्यक्रम:** राजभाषा विभाग द्वारा प्रतिवर्ष सभी मंत्रालयों और विभागों के लिए एक 'वार्षिक कार्यक्रम' (Annual Programme) तैयार करना अनिवार्य किया गया, जिसमें हिन्दी पत्राचार और कार्य के निश्चित प्रतिशत लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं।
 * **भर्ती में समानता:** संघ लोक सेवा आयोग की अखिल भारतीय व केंद्रीय सेवा परीक्षाओं में सभी संविधान-मान्य भाषाओं को माध्यम के रूप में अवसर देने का सिद्धांत स्वीकार किया गया।

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